Kumaon Aur Kailash
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Kailash Mansarovar Yatra 2012 Route Map
Article By :
Anand Achtani, New Delhi

om namah shivay to all kailashi friends, today i am on this site to share my best memories. i was not aware of this great yatra at all but when my husband told me about this i really enjoyed this when we are selected we were not that much of prepared to go but finally dada arranged all d way and we reached d place where we really looked the amazing sites, but the best place is charan sparsh where i really think that he(Bhole dada) caught me and bought me there. my husband forced me to walk and reach there by hook and crook and when i was there tears came into my eyes as it is and i really believed that yes yes yes this is the place where God Shiva lives with his family i felt so tiny and think that there is nothing great in front of this place om namh shivay happy journey to all d yatris of 2012

Om Namah Shivay.
Our Best Wishes are with all Batches of KM Yatris this year. May Lord Shiva bless you all with a Blissful Yatra. It is an unforgettable experience.

ONE REQUEST TO ALL - PLEASE TRY TO MAINTAIN THE BLISS AND BEAUTY OF NATURE. LEAVE IT AS IT IS, IF NOT BETTER FOR FUTURE GENERATIONS.


PLEASE DO NOT USE / THROS PLASTIC AROUND IN THE ENTIRE YATRA AND DISCOURAGE OTHERS FROM DOING SO.


PLEASE DO NOT BATHE / WASH CLOTHES IN THE HOLY MANASAROVAR.

Ketan Vanjara 05/31/2012

All Yatrees, please take extra warmers, in 2010, one freind frm Chennai came in one nlon sweater, some south indians have no idea what cold is. Please take extra as it will be very cold in there. Bhole Baba will surely take care of the batch, but go prepared.

Om Namah Shivay

Rajesh Gupta 05/29/2012

OM NAMOH SHIVAY

Thanks to my Shiv Bhakta (Name not disclosed) for giving comments on my observations inline with the Repeaters.
My request is Pl. rethink repeaters will never go against freshers in any case.
In case Our MEA if initiate on Repeater issue I can give suggestions which will be helps to all freshers/repeaters in future Yatras .Youngesters (18-25Y)Pl. note & keep in mind all times DON'T BE GAMA IN LAND OF LAMA'S as their Yatra Failure rate is high as/previous records.
Rest My Shiva will take care to all here & in China.
At last
All Lucky souls going for KMY are requested never try to impress your Guide in China & show your unity all the times there.All yatris Pl. take care for Old age (above 50Y)/ladies during yatra & support your LO.
All the best.

D K LAMBA 05/24/2012

Om Namah shivay,

Good Luck to all 2012 selected yatris. Do go to Kailash without any iota of feeling. Meet shiv and maa parvati. This is one human birth . You may not be getting second chance to meet him. Embrace Lord Shiv------with love.
PRAVEEN BHARDWAJ 05/16/2012


Online Registration for KMY 2013 - click here

LAST DATES:
 04 March 2013 to file an online application.
 11 March 2013 to submit printout of an online or printable application.
SHIV CHALISA    शिव चालीसा

दोहा
जय गणेश गिरिजासुवन, मंगल मूल सुजान
कहत अयोध्यादास तुम, देउ अभय वरदान
चौपाई
जय गिरिजापति दीनदयाला,सदा करत सन्तन प्रतिपाला.
भाल चन्द्रमा सोहत नीके. कानन कुण्डल नागफ़णी के.
अंग गौर सिर गंग बहाये. मुण्माल तन क्षार लगाये.
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे. छवि को देखि नाग मुनि मोहे.
मैंना मातु कि हवे दुलारी. वाम अंग सोहत छवि न्यारी.
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी, करत सदा शत्रुन क्षयकारी.
नन्दि गणेश सोहे तहं कैसे, सागर मध्य कमल हैं जैसे.
कार्तिक श्याम और गणराऊ. या छवि को जात न काऊ.
देवन जबहिं जाय पुकारा. तबहिं दुख प्रभु आप निवारा.
किया उपद्रव तारक भारी. देवन सब मिलि तुमहिं जुगारी.
तुरत शडानन आप पठायउ. लव निमेश महं मारि गिरायउ.
आप जलंधर असुर संहारा. सुयश तुम्हार विदित संसारा.
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई. सबहिं कृपा कर लीन बचाई.

किया तपहिं भारी. पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी.
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं. अकथ अनादि भेद नही पाई.
पकटी उदधि मंथन में ज्वाला. जरे सुरासुर भए विहाला.
कीन्ह दया तहँ करी सहाई. नीलकंठ तब नाम कहाई.
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा. जीत के लंक विभीशण दीन्हा.
सहस कमल में हो रहे धारी. कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी.
एक कमल प्रभु राखेउ जोई. कमल नैन पूजन चहुं सोई.
कठिन भक्ती देखी प्रभु शंकर. भए प्रसन्न दिए इच्छित वर.
जय जय अनन्त अविनाशी. करत कृपा सबके घट वासी.
दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं. भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै.
त्राहि-त्राहि मैं नाथ पुकारो. येही अवसर मोहि आन उबारो.
ले त्रिशूल शत्रुन को मारो. संकट से मोहि आन उबारो.
मातु-पिता भ्राता सब कोई. संकट में पूछत नही कोई.
स्वामी एक है आस तुम्हारी. आय हरहु अब संकट भारी.
धन निर्धन को देत सदा ही.जो कोई जांचे वो फ़ल पाहीं.
अस्तुति केहि विधि करुँ तुम्हारी. क्षमहु नाथ अब चूक हमारी
शंकर हो संकट के नाशन. मंगल कारण विघ्न विनाशन.
योगी यती मुनि ध्यान लगावैं. नारद शारद शीश नवावैं.

नमो नमो जय नमः शिवाये. सुर ब्रह्मादिक पार न पाये.
जो यह पाठ करे मन लाई. तापर होत है शम्भु सहाई.
ऋनियां जो कोई हो अधिकारी. पाठ करे सो पावन हारी.
पुत्रहीन कर इच्छा जोई. निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई.
पण्डित त्रयोदशी को लावे. ध्यानपूर्वक होम करावे.
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे, शंकर सन्मुख पाठ सुनावे.
जन्म-जन्म के पाप नसावे.अन्त वास शिवपुर में पावे.
कहै अयोध्या आस तुम्हारी. जानि सकल दुख हरहु हमारी.
दोहा
नित्य नेम कर प्रातः ही, पाठ करो चालीस
तुम मेरी मनोकमना, पूर्ण करो जगदीश
मगसर छठि हेमन्त ऋतु, संवत चौसठ जान
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण


 मंत्र-भगवान शिव
भगवान भोलेनाथ की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा शिवजी को स्नान समर्पण करना चाहिए-
ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य सकम्भ सर्ज्जनीस्थो |
वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद् ||

भगवान शिव की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उन्हें यज्ञोपवीत समर्पण करना चाहिए-
ॐ ब्रह्म ज्ज्ञानप्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेन आवः |
स बुध्न्या उपमा अस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः ||


शिवजी की पूजा में इस मंत्र के द्वारा भगवान भोलेनाथ को गंध समर्पण करना चाहिए-
ॐ नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः |
शर्वाय च पशुपतये च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च ||


भगवान भोलेनाथ की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा त्रिलोचनाय भगवान शिव को पुष्प समर्पण करना चाहिए-
ॐ नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च |
नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च नमः शष्प्याय च फेन्याय च ||


शिव की पूजा में इस मंत्र के द्वारा अर्धनारीश्वर भगवान भोलेनाथ को धूप समर्पण करना चाहिए-
ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च |
नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च ||


इस मंत्र के द्वारा चन्द्रशेखर भगवान भोलेनाथ को नैवेद्य अर्पण करना चाहिए-
ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च |
नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुधन्याय च ||


 शिव पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा भगवान शिव को ताम्बूल पूगीफल समर्पण करना चाहिए-
ॐ इमा रुद्राय तवसे कपर्दिने क्षयद्वीराय प्रभरामहे मतीः |
यशा शमशद् द्विपदे चतुष्पदे विश्वं पुष्टं ग्रामे अस्तिमन्ननातुराम् ||


भगवान शिव की पूजा करते समय इस मंत्र से भोलेनाथ को सुगन्धित तेल समर्पण करना चाहिए-
ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च |
नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च ||


इस मंत्र के द्वारा भगवान भोलेनाथ को दीप दर्शन कराना चाहिए-
ॐ नमः आराधे चात्रिराय च नमः शीघ्रयाय च शीभ्याय च |
नमः ऊर्म्याय चावस्वन्याय च नमो नादेयाय च द्वीप्याय च ||


इस मंत्र से भगवान शिवजी को बिल्वपत्र समर्पण करना चाहिए-
दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम् |
अघोरपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||


Source: Raftaar Live

 कैलाश मानसरोवर
कैलाश मानसरोवर को शिव-पार्वती का घर माना जाता है. सदियों से देवता, दानव, योगी, मुनि और सिद्ध महात्मा यहां तपस्या करते आए हैं. प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हिमालय जैसा कोई दूसरा पर्वत नहीं है क्योंकि यहां भगवान शिव का निवास है और मानसरोवर भी यहीं स्थित है. हर वर्ष मई-जून महीने में भारत सरकार के सौजन्य से सैकड़ों तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर की यात्रा करते हैं. इसके लिए उन्हें भारत की सीमा लांघकर चीन में प्रवेश करना पड़ता है, क्योंकि यात्रा का यह भाग चीन में है. कैलाश पर्वत की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 20 हजार फीट है. यह यात्रा अत्यंत कठिन मानी जाती है. कहते हैं जिसको भोले बाबा का बुलावा होता है वही इस यात्रा को कर सकता है. सामान्य तौर पर यह यात्रा 28 दिन में पूरी होती है. कैलाश पर्वत कुल 48 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. कैलाश पर्वत की परिक्रमा वहां की सबसे निचली चोटी दारचेन से शुरू होकर सबसे ऊंची चोटी डेशफू गोम्पा पर पूरी होती है. यहां से कैलाश पर्वत को देखने पर ऐसा लगता है, मानों भगवान शिव स्वयं बर्फ से बने शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. इस चोटी को हिमरत्न भी कहा जाता है.



मानसरोवर (झील) यह पवित्र झील समुद्र तल से लगभग 4 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और लगभग 320 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है. यहीं से एशिया की चार प्रमुख नदियां- ब्रह्मपुत्र, करनाली, सिंधु और सतलज निकलती हैं. मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति मानसरोवर (झील) की धरती को छू लेता है, वह ब्रह्मा के बनाये स्वर्ग में पहुंच जाता है और जो व्यक्ति झील का पानी पी लेता है, उसे भगवान शिव के बनाये स्वर्ग में जाने का अधिकार मिल जाता है. जनश्रुति यह भी है कि ब्रह्मा ने अपने मन-मस्तिष्क से मानसरोवर बनाया है. दरअसल, मानसरोवर संस्कृत के मानस (मस्तिष्क) और सरोवर (झील) शब्द से बना है. मान्यता है कि ब्रह्ममुहुर्त (प्रात:काल 3-5 बजे) में देवता गण यहां स्नान करते हैं. ग्रंथों के अनुसार, सती का हाथ इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह झील तैयार हुई. इसलिए इसे 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना गया है. गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ पिघलती है, तो एक प्रकार की आवाज भी सुनाई देती है. श्रद्धालु मानते हैं कि यह मृदंग की आवाज है. मान्यता यह भी है कि कोई व्यक्ति मानसरोवर में एक बार डुबकी लगा ले, तो वह रुद्रलोक पहुंच सकता है. एक किंवदंती यह भी है कि नीलकमल केवल मानसरोवर में ही खिलता और दिखता है.

Source: Raftaar Live
 

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NOTE INDO-NEPAL  INERNATIONAL BOUNDERY IS 
CENTRE COURSE OF HOLY RIVER KALI GANGA


 




Tips for LO's & Yatries for Kailash Mansarovar Yatra
As desired by you I am making my suggestions for your consideration.  Although I know and believe I am too small a person to make such attempt..
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The mountains must be treated with respect and attempts to ‘conquer’ mountains or showing off physical fitness should not be made. One must walk at a steady, rhythmic pace. Walking with a companion...

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Planning And Preparation for Kailash Mansarovar Yatra


Since this pilgrimage is nothing short of an expedition, it places. Many uncommon demands and situations. Awareness to these problems is essential to complete the voyage successfully with confidence.

Once the voyage commences the panoramic Himalaya and Tibet cocoon the pilgrimage in their effulgence and they drift beyond the reach of a conventional world.
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The Maha Mrityunjaya Mantra
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Unsung Hero Zorawar Singh :

Just how divorced our "secular" education system is from our tradition and history became obvious to me when, during my recent trip to Kailash-Mansarovar, ....
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About Kailash Mansarovar Yatra

The Ministry of External Affairs organises the Kailash-Manasarovar pilgrimage from June to Sept. One should have attained the age of 18 years to apply. Because of the rush, those who have once visited the mount are advised to give way to fresh applicants.

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